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तुलसी माला पहनने के नियम, प्रकार और इसका आध्यात्मिक महत्व

माला (Tulsi Mala) केवल एक धार्मिक वस्तु नहीं, बल्कि भक्ति, पवित्रता और आध्यात्मिक सुरक्षा का प्रतीक है।
शास्त्रों में कहा गया है कि —

यः तुलसीकं कान्ठे धत्ते तस्य पापानि नश्यन्ति।”
अर्थात जो व्यक्ति अपने गले में तुलसी की माला धारण करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और भगवान विष्णु की कृपा उस पर बनी रहती है।


तुलसी माला के प्रकार (Types of Tulsi Mala)

तुलसी माला दो प्रमुख प्रकार की होती है, और दोनों का अपना-अपना आध्यात्मिक प्रभाव माना गया है —

1. श्यामा तुलसी (Shyama Tulsi)

  • इसका रंग गहरा भूरा या काला होता है।
  • इसे “कृष्ण तुलसी” भी कहा जाता है क्योंकि यह भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है।
  • इसे धारण करने वाला व्यक्ति नकारात्मकता, भय और मानसिक तनाव से मुक्त रहता है।
  • यह ध्यान और साधना करने वालों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।

2. राम तुलसी (Rama Tulsi)

  • इसका रंग हल्का हरा होता है।
  • इसे “शांत तुलसी” कहा जाता है क्योंकि यह शांति, संयम और भक्ति भावना बढ़ाती है।
  • जो व्यक्ति सादगी और सात्त्विक जीवन जीना चाहता है, उसके लिए राम तुलसी उपयुक्त है।

बहुत से भक्त दोनों प्रकार की तुलसी माला को एक साथ पहनते हैं ताकि दोनों का संतुलित प्रभाव मिले।


माला कौन पहन सकता है? (Who Can Wear Tulsi Mala)

माला पहनने पर कोई जाति, वर्ग या लिंग की सीमा नहीं है — यह सभी के लिए पवित्र है।
परंतु इसे पहनने वाले को शुद्ध जीवनशैली और भक्ति मार्ग अपनाना चाहिए।

यह लोग तुलसी माला धारण कर सकते हैं —

  1. जो भगवान श्रीकृष्ण, श्रीराम या श्रीविष्णु के भक्त हैं।
  2. जो भक्ति या ध्यान के मार्ग पर हैं।
  3. जो सात्त्विक जीवन जीना चाहते हैं।
  4. जो नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक तनाव से मुक्त रहना चाहते हैं।
  5. ब्रह्मचारी, गृहस्थ, साधु, या कोई भी श्रद्धालु भक्त तुलसी माला पहन सकता है।

किन्हें नहीं पहननी चाहिए —

  • जो मांस, शराब या नशे का सेवन करते हैं।
  • जो तुलसी देवी के प्रति श्रद्धा नहीं रखते।
  • जो जीवन में बार-बार अपवित्र आचरण करते हैं।

📿माला पहनने के नियम (Tulsi Mala Pehene ke Niyam)

  1. स्नान के बाद शुद्ध अवस्था में पहनें।
  2. माला को गुरु या वैष्णव भक्त से धारण करवाना श्रेष्ठ है।
  3. इसे हमेशा गले में रखें, पैरों के पास या अपवित्र स्थान पर कभी न रखें।
  4. मांस, शराब, प्याज-लहसुन का त्याग करें।
  5. साबुन, केमिकल या परफ्यूम से माला को बचाएं।
  6. सोते या स्नान करते समय माला निकालने की आवश्यकता नहीं है।
  7. अशुद्ध अवस्था (शौच, मासिक धर्म आदि) में माला को न छुएं।
  8. माला को आदरपूर्वक संभालें, इसे हमेशा भगवान के नाम का जप करते समय स्पर्श करें।

माला के लाभ (Benefits of Tulsi Mala)

  • मन को शांति, स्थिरता और सकारात्मकता देती है।
  • नकारात्मक शक्तियों, भय और नज़र दोष से रक्षा करती है।
  • आत्मा को सात्त्विक ऊर्जा और भक्ति भाव से भर देती है।
  • ध्यान और जप के दौरान एकाग्रता बढ़ाती है।
  • शरीर की ऊर्जा को संतुलित करती है और मानसिक तनाव कम करती है।

माला का आध्यात्मिक रहस्य:

तुलसी देवी स्वयं भक्ति की प्रतीक हैं।
जो व्यक्ति श्रद्धा, पवित्रता और अनुशासन के साथ तुलसी माला धारण करता है, उसके जीवन में
भक्ति, शांति और भगवान की कृपा स्वतः आने लगती है।

तुलसी बिना नहीं शोभत हरी, तुलसी हरि के धाम में वास।”


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